रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद रविवार को स्वदेश रवाना हो गए। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में सदस्य और साझेदार देशों के प्रमुखों ने कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया और सर्वसम्मति से ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ को मंजूरी दी।

राष्ट्रपति पुतिन सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे थे। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को गति देने पर मुख्य जोर रहा। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात इस महीने की शुरुआत में किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हुई थी।

सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन सहित अन्य वैश्विक नेताओं के साथ मंच साझा किया। शिखर सम्मेलन के समापन पर जारी संयुक्त घोषणापत्र में मध्य पूर्व के मौजूदा तनाव पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय विवादों को केवल कूटनीति व बातचीत से सुलझाने का आह्वान किया गया।

शनिवार को अपने संबोधन के दौरान रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों की तथाकथित “औपनिवेशिक मानसिकता” पर कड़ा प्रहार किया और आरोप लगाया कि ये ताकतें एक संतुलित और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के गठन में बाधा उत्पन्न कर रही हैं।

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