नीति आयोग ने अपनी नवीनतम ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि सरकार को खनिज संसाधनों की नई खोज में तेजी लाने के लिए भू-वैज्ञानिक आंकड़ों तक पहुंच आसान बनाने, छोटी अन्वेषण कंपनियों को जोखिम पूंजी/वित्तीय सहायता देने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के उपाय करने चाहिए।

रिपोर्ट में परियोजनाओं में देरी को कम करने के लिए अनुपालन रिपोर्ट की वैधता अवधि बढ़ाने, बार-बार होने वाली मंजूरी की प्रक्रियाओं को कम करने, क्षतिपूर्तिकर वनीकरण (कैम्पा) प्रक्रियाओं को सरल बनाने और मौजूदा तथा पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार के लिए स्पष्ट नियम तय करने की सिफारिश की गई है।

आयोग ने नवीकरणीय ऊर्जा (ओपन एक्सेस) नियमों में एकरूपता लाने, औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बैंकिंग सीमा बढ़ाने, पारेषण शुल्क (ट्रांसमिशन चार्ज) को तर्कसंगत बनाने, खनिज स्लरी पाइपलाइन परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने और लॉजिस्टिक सुविधाओं से जुड़े जीएसटी मुद्दों को सुलझाने पर जोर दिया है।

विमानन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए आयोग ने उच्च गुणवत्ता वाले मिश्र धातु इस्पात, विशेष मिश्र धातु, एल्युमीनियम और टाइटेनियम मिश्र धातुओं का घरेलू उत्पादन बढ़ाने, चरणबद्ध तरीके से घरेलू सामग्री के उपयोग की अनिवार्यता लागू करने और भारतीय कंपनियों को आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने की सिफारिश की। साथ ही, यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के तहत भारतीय निर्यातकों की मदद करने का सुझाव भी दिया।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक धातु मांग 1.63 लाख करोड़ डॉलर रही, जिसमें भारत का निर्यात 34.8 अरब डॉलर (2.1%) रहा। वैश्विक स्तर पर 826.8 अरब डॉलर के लौह एवं इस्पात बाजार में भारत की हिस्सेदारी 2.5% है।

भारत प्राथमिक एल्युमीनियम और इस्पात उत्पादन में विश्व में दूसरे, लौह अयस्क, क्रोमाइट व जस्ता उत्पादन में तीसरे तथा मैंगनीज में पांचवें स्थान पर है। थोक खनिजों में भारत की आत्मनिर्भरता लौह अयस्क में 100%, जस्ता में 94%, क्रोमाइट में 92% और बॉक्साइट में 90% है, जबकि मैंगनीज में 37%, तांबे में 35% और मैग्नेसाइट में 17% है।

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